बोकारो के चास प्रखंड की चाकुलिया पंचायत अंतर्गत चिंतामी गांव की चार बहन नेहा, श्वेता, सीमा व अप्पू ने आम की बागवानी के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी हैं। झारखंड सरकार के बिरसा हरित ग्राम योजना का लाभ लेने के लिए पहले अपने-अपने अभिभावकों को प्रेरित किया। इसके बाद योजना का लाभ लेकर अपने परिवार को आगे बढ़ाने में मदद की।
चिंतामी गांव के अधिकांश किसान पारंपरिक खेती पर निर्भर हैं, वहीं इन बहनों ने बंजर जमीन को हरे-भरे आम के बाग में बदलकर क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। अप्पू ने बताया कि वर्ष 2022 में उन्हें अखबार के माध्यम से झारखंड सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने चाचा को योजना के बारे में बताया और प्रखंड कार्यालय से संपर्क कर इसका लाभ लिया।
मनरेगा के तहत एक एकड़ बंजर भूमि पर 112 आम के पौधे उपलब्ध कराए गए, जिससे उनकी बागवानी यात्रा की शुरुआत हुई। आज वे पौधे पैसा दे रहे हैं। इसके साथ ही फूल व सब्जी की खेती भी हो करवा रही हैं। एक वर्ष में एक एकड़ में आम, फूल व सब्जी के माध्यम से लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है।
