महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता के लिए काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को 10वें मार्था फैरल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शनिवार को विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में देशभर से मिले 139 व्यक्तिगत और 117 संस्थागत नामांकनों में से चार श्रेणियों में विजेताओं का चयन किया गया।‘मोस्ट प्रॉमिसिंग इंडिविजुअल’ पुरस्कार उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की दलित सामाजिक कार्यकर्ता सीमा गौतम को मिला।
वह दलित महिलाओं तथा जातिगत और यौन हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए कानूनी सहायता, मुआवजा, शिक्षा और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का काम करती हैं। उनके नेतृत्व में चले भूमि अधिकार आंदोलन से करीब एक लाख महिलाएं, पुरुष और युवा जुड़े तथा लगभग 800 परिवारों को भूमि अधिकारों से संबंधित सरकारी आदेश मिले।‘विशेष जूरी पुरस्कार-व्यक्तिगत’ मध्य प्रदेश के बाछड़ा समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ता आकाश चौहान को मिला।
वह महिलाओं और लड़कियों को पीढ़ियों से चले आ रहे देह व्यापार और शोषण से बाहर निकालने के लिए काम कर रहे हैं।संस्थागत श्रेणी में ‘बेस्ट ऑर्गनाइजेशन फॉर जेंडर इक्वलिटी’ पुरस्कार बिहार के मधुबनी स्थित सर्व प्रयास संस्थान (एसपीएस) को मिला। संस्था बाल संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और आजीविका के क्षेत्र में काम करती है। वहीं ‘विशेष जूरी पुरस्कार-संस्था’ नागालैंड के सिस्टरहुड नेटवर्क को दिया गया। संगठन महिलाओं और बच्चों के लिए शिक्षा, आजीविका, कानूनी साक्षरता तथा लैंगिक हिंसा के खिलाफ जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय है।
