भाजपा को आईना दिखाने की हिम्मत हर किसी में नहीं।नेपाल और बांग्लादेश में जनता का आक्रोश क्यों फूटा? भाजपा को आत्ममंथन करना चाहिए, न कि सवाल उठाने वालों को देशविरोधी ठहराना झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के हालिया बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा मचाया जा रहा राजनीतिक शोर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर भाजपा को जनता के गुस्से की चर्चा से इतनी परेशानी क्यों है? क्या लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना अपराध है? क्या बेरोजगार युवाओं, परेशान किसानों, महंगाई से जूझते मिडिल क्लास , दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की आवाज़ उठाना देशविरोधी है?डॉ. इरफान अंसारी ने अपने बयान के माध्यम से देश में बढ़ती जनआक्रोश की ओर ध्यान दिलाया है। उनके बयान बीजेपी जान बूझकर राजनीति कर रही है। इसमें उठाए गए जनहित के सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भाजपा को बयान के शब्दों पर राजनीति करने के बजाय उन परिस्थितियों पर जवाब देना चाहिए, जिनकी वजह से जनता में असंतोष पैदा और आक्रोश पैदा हुआ है।हम सब जानते हैं, नेपाल और बांग्लादेश में जनता का आक्रोश अचानक पैदा नहीं हुआ था। वहां बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरूपयोग, शासन के प्रति अविश्वास और युवाओं में बढ़ती निराशा, बेरोजगारी, जैसे मुद्दों ने व्यापक जन असंतोष और आक्रोश को जन्म दिया। क्या इन देशों की परिस्थितियां भारत से अलग हैं? जनता की नाराजगी के कारणों को समझना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है। डॉ. इरफ़ान अंसारी ने इसी ओर सरकार को सचेत किया था। उन्होंने ने उदहारण सौरूप कहा था अगर अभी भी सरकार नहीं चेती तो भारत को नेपाल ओर बांग्लादेश बनने से कोई भी नहीं रोक सकता है।आज भारत में भी बेरोजगारी, महंगाई, भरस्टाचार, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, मजदूरों ओर किसानों के नाइंसाफी अत्याचार, सामाजिक विभाजन, ध्रुवीकरण और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरूपयोग ओर संविधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिये करोड़ों लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। विपक्ष की आपत्तियां को दरकिनार किया जा रहा है। ऐसे में जनता की आवाज़ को कोई उठता है तो बीजेपी ओर सत्ता उन्ही नेताओं को निशाना बनाती है। बल्कि सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।आज भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा जनता के सामने है।भाजपा आज लोकतंत्र और राष्ट्रवाद की सबसे बड़ी पैरोकार बनने का दावा करती है, लेकिन जब विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, तब उसे देशविरोधी, अराजक और साजिशकर्ता बताने की राजनीति शुरू हो जाती है। यह उसका चरित्र है। भाजपा को याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का असली अर्थ जनता की आवाज़ सुनना, असहमति का सम्मान करना और सत्ता को जवाबदेह बनाना है। बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की परेशानी, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भाजपा को जवाब देना चाहिए। विपक्ष को चुप कराने की कोशिश से जनता के सवाल खत्म नहीं होते।डॉ. इरफान अंसारी झारखंड की राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शुमार हैं, जिनकी पहचान सिर्फ सत्ता और सियासी पदों तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी बेबाकी, जुझारूपन और जनता के सवालों पर मुखर रहने की शैली से होती है। वे उन नेताओं में हैं जो राजनीतिक दबावों के सामने खामोश रहने के बजाय अपनी बात खुलकर रखने का साहस दिखाते हैं। उनकी राजनीति में आक्रामकता भी है, आत्मविश्वास भी और सत्ता से सवाल पूछने का माद्दा भी। जब भाजपा अपनी राजनीतिक ताकत के दम पर विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश करती है, तब डॉ. इरफान अंसारी जैसे नेता लोकतंत्र में असहमति की अहमियत को मजबूती से सामने रखते हैं।उनकी बेबाक टिप्पणी भाजपा के लिए भले ही असहजता पैदा करती हो, लेकिन लोकतंत्र में यही तो विपक्ष की असली भूमिका है। सत्ता को आईना दिखाना, जनता के दर्द को आवाज़ देना और उन सवालों को उठाना जिन्हें सत्ता पक्ष सुनना नहीं चाहता। डॉ. इरफान अंसारी के बयान से असहमत होने का अधिकार हर किसी को है, मगर उनकी राजनीतिक अभिव्यक्ति को देशविरोधी करार देना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा है। इरफान अंसारी की बेबाकी को विवाद के चश्मे से नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल पूछने के लोकतांत्रिक साहस के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके नेपाल और बांग्लादेश वाली ब्यान को वहां गठित घटनाओं से सबक लेना चाहिए, न कि उन घटनाओं का जिक्र करने वाले नेताओं को निशाना बनाना चाहिए।धन्यवाद तनवीर अहमद सामाजिक कार्यकर्त्ता 9431101871
