बिहार की राजनीति में सरकारी आवास को लेकर विवाद तेज हो गया है। शेखपुरा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना नाम लिए राबड़ी देवी और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं है और लोकतंत्र में जनता के सेवकों को नियमों का पालन करना चाहिए।सीएम सम्राट चौधरी ने कहा, “यह किसी की बपौती नहीं हो सकती है। यह राजतंत्र नहीं है कि एक ही परिवार पीढ़ियों तक सरकारी घर पर कब्जा बनाए रखे। बेटा अलग घर चाहता है, माताजी अलग घर चाहती हैं, लेकिन जनता को भूल जाते हैं।”उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि 2016 से 2026 तक कई महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद वे अपने निजी घर में ही रहते थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें बिहार की सेवा का अवसर दिया है।मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पद छोड़ने के तुरंत बाद सरकारी आवास खाली कर दिया और नए आवास में चले गए। सम्राट चौधरी ने कहा कि यही लोकतांत्रिक परंपरा और जनसेवक की पहचान है।वहीं, राबड़ी देवी के सरकारी आवास खाली करने को लेकर चल रहे विवाद पर उनके बेटे तेज प्रताप यादव ने कहा था कि पहले नीतीश कुमार को आवास खाली करना चाहिए था, उसके बाद राबड़ी देवी भी आवास छोड़ देतीं।मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर “लोक सेवक आवास” रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी आवास जनता की सेवा के लिए होता है, किसी व्यक्ति या परिवार के स्थायी उपयोग के लिए नहीं।इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में आवास विवाद को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज होने की संभावना है।
