साहिबगंज से उठी भारत रत्न की मांग, दिशोम गुरु को सर्वोच्च सम्मान देने के लिए सभी दलों से एकजुट होने की अपील

झारखंड न्यूज़ रांची न्यूज़
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साहिबगंज। झारखंड आंदोलन के प्रणेता और दिशोम गुरु वीर शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को साहिबगंज भावनाओं, स्मृतियों और संकल्प का केंद्र बना रहा। सिदो-कान्हू स्टेडियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि गुरुजी केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान और संघर्ष के प्रतीक हैं।

कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक चर्चा झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव एवं प्रवक्ता पंकज मिश्रा के संबोधन की रही। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान किसी एक दल या प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने देश के लोकतांत्रिक इतिहास में वंचितों, आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। ऐसे व्यक्तित्व को केवल पद्म सम्मान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिशोम गुरु भारत रत्न के वास्तविक हकदार हैं और अब समय आ गया है कि उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया जाए।

पंकज मिश्रा ने सभी राजनीतिक दलों से दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर प्रधानमंत्री को संयुक्त रूप से पत्र लिखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह मांग किसी पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की भावना है। यदि राज्य के सभी जनप्रतिनिधि एक स्वर में आवाज उठाएं तो यह गुरुजी के संघर्ष के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अपने संबोधन में उन्होंने शिबू सोरेन के आंदोलनकारी जीवन को विस्तार से याद करते हुए कहा कि गुरुजी ने महाजनी प्रथा और शोषण के खिलाफ गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया। धान कटनी आंदोलन से लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठन और अलग राज्य के लंबे संघर्ष तक, उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और गरीबों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। मिश्रा ने कहा कि आज अलग झारखंड राज्य का अस्तित्व गुरुजी के अथक संघर्ष और त्याग का परिणाम है।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि गुरुजी आज भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विचारधारा, संघर्ष और सीख आज भी लाखों लोगों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है। उनके व्यक्तित्व का स्थान कोई नहीं ले सकता।

श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के राजस्व एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि दिशोम गुरु अद्भुत इच्छाशक्ति वाले नेता थे। संसाधनों के अभाव के दौर में भी वे लगातार गांव-गांव जाकर लोगों के बीच पहुंचते थे और संघर्ष की मशाल जलाए रखते थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी गुरुजी के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं और झारखंड को विकास तथा सामाजिक बदलाव की नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं।

इस अवसर पर राजमहल विधायक मोहम्मद ताजुद्दीन, पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, पूर्व विधायक डॉ. ध्रुव भगत, भाजपा नेता अमित सिंह, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रणधीर सिंह, आजसू जिलाध्यक्ष चतुरानंद पांडेय, जदयू जिलाध्यक्ष सुनील सिन्हा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने गुरुजी के संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

पुण्यतिथि के अवसर पर साहिबगंज जिला मुख्यालय में शिबू सोरेन की दो नई आदमकद प्रतिमाओं का भी अनावरण किया गया। समाहरणालय के सामने निर्माणाधीन शिबू सोरेन चिल्ड्रेन पार्क तथा साक्षरता चौक पर स्थापित प्रतिमाओं के लोकार्पण के दौरान पूरा परिसर “दिशोम गुरु अमर रहें” और “झारखंड के शेर शिबू सोरेन अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि सभा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि झारखंड की राजनीति और सामाजिक इतिहास में दिशोम गुरु का योगदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्थायी आधार है। वहीं पंकज मिश्रा द्वारा उठाई गई भारत रत्न की मांग अब राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गई है।

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