चुनाव आयोग कर्नाटक के श्रृंगेरी विधानसभा चुनाव 2023 के वोटों की गिनती रिकार्डिंग ढूंढ नहीं पा रहा है. इस विधानसभा में हार-जीत के मुद्दे पर छिड़ी कानूनी जंग में चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट को इस बात की जानकारी दी गयी. वीडियो नहीं मिलने की कहानी पर कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया. कोर्ट ने कहा कि यह मंजूर नहीं. कोर्ट ने सुनवाई की अगली तिथि 15 फरवरी 2027 तय की. साथ ही चुनाव आयोग को वीडियो रिकार्डिंग पेश करने का निर्देश दिया. कर्नाटक के श्रृंगेरी विधानसभा चुनाव में हार-जीत के मामले पर कांग्रेस नेता टीडी राजेगौड़ा और भाजपा नेता डीएन जीवराज के बीच कानूनी विवाद चल रहा है. क्योंकि 2023 में इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा को विजयी घोषित किया गया था. फिर वोटों की गिनती दुबारा की गई. और बाद में भाजपा के डीएन जीवराज को विजय घोषित किया गया.
इस मुद्दे पर उभरे कानूनी विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय कुमार और न्यायाधीश संजीव सचदेवा की पीठ में चल रही है. 14 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान हार-जीत के इस विवाद को निपटाने के लिए 2023 में हुई वोटों की गिनती का वीडियो रिकार्डिंग देखने का आदेश देने की बात कही. तब चुनाव आयोग के वकील शेषाद्री नायडू ने कोर्ट को बताया कि वोटों की गिनती की रिकार्डिंग आयोग को नहीं मिल रहा है. चुनाव आयोग की बात सुनने के बाद बाद कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग ऐसा कैसे कह सकता है कि रिकार्डिंग नहीं मिल रहा है. क्या उसने अपना रिकार्ड खो दिया है. आयोग का काम चुनाव कराना और उससे संबंधित दस्तावेज रखना है. आयोग ने वीडियो रिकार्डिंग चुने हुए उम्मीदवार को दिया होगा. रिकॉर्डिंग नहीं मिलन की दलील कोर्ट को स्वीकार नहीं. कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि वोटों की गिनती से संबंधित दस्तावेज़ सुनवाई की अगली तिथि पर पेश करें. अगर आयोग वीडियो नहीं पेश करता है, तो इससे प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जायेगा.
क्या है मामलाकर्नाटक के श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी टीडी राजेगौड़ा को विजयी घोषित किया गया था. उन्हें भाजपा प्रत्याशी डीएन जीवराज के सिर्फ 251 वोट अधिक मिले थे. रिजल्ट से असंतुष्ट भाजपा प्रत्याशी ने हाईकोर्ट में राजेगौड़ी की जीत को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने वोटों की दोबारा गिनती करायी. इसमें भाजपा प्रत्याशी डीएन जीवराजे को विजयी घोषित किया गया. हाईकोर्ट के आदेश पर हुई गिनती के रिजल्ट के आधार पर कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ी की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गयी. इसके बाद राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. मई महीन में सुप्रीम कोर्ट ने हुई सुनवाई के दौरान डीएन राजेगौड़ा की सदस्यता बहाल कर दी.
सुप्रीम कोर्ट में राजेगौड़ा की ओर से यह तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने केवल 279 वोट खारिज किए गए पोस्टल बैलेट के दोबारा सत्यापन का आदेश दिया था. लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर गलत तरीके से उन 562 वैध पोस्टल बैलेट की फिर से गिनती की जो राजेगौड़ा के पक्ष में थे.
