ट्रंप की करारी हार, बने लंगड़ा बत्तख़, राष्ट्रवादी रथ पर सवार रिपब्लिकन पार्टी का भविष्य पर भी सवाल

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अमेरिका के 2026 मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों बेहद मुश्किल होगा. उनके पास अब सिर्फ वीटो का पावर ही बचा है. समाचार एजेंसी रायटर के अनुसार कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण खोने से ट्रंप अब “लंगड़ा बत्तख” (lame duck) राष्ट्रपति बनने की राह पर हैं, जबकि उनकी पार्टी को राष्ट्रवादी और MAGA एजेंडे पर सवार होकर मिली पिछली सफलताएं सवालों के घेरे में आ गई हैं.

एपीन्यूज के मुताबिक़ डेमोक्रेट्स ने सीनेट का नियंत्रण हासिल कर लिया है. टेक्सास (जेम्स तालारिको), कंसास (एडम हैमिल्टन), साउथ कैरोलिना (एनी एंड्रयूज), ओहायो (शेरोड ब्राउन), आयोवा (जोश ट्यूरेक) और नॉर्थ कैरोलिना (रॉय कूपर) जैसी रिपब्लिकन गढ़ मानी जाने वाली सीटों पर उलटफेर हुए हैं. हाउस में भी डेमोक्रेट्स बड़ी बढ़त के साथ बहुमत की ओर बढ़ रहे हैं. ये नतीजे ट्रंप प्रशासन की नीतियों, विशेषकर महंगाई, ईंधन कीमतें और ईरान युद्ध के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी को दर्शाते हैं.

कहां-कहां हारेसीनेट : डेमोक्रेट्स ने नियंत्रण हासिल कर लिया है. वे कई रिपब्लिकन गढ़ों में सीटें फ्लिप करने में सफल रहे.टेक्सास: जेम्स तालारिको (डेमोक्रेट) ने केन पैक्सटन को हराया (1988 के बाद पहली बार डेमोक्रेट सीनेटर).

कंसास: एडम हैमिल्टन (1932 के बाद पहली बार). साउथ कैरोलिना: एनी एंड्रयूज (1998 के बाद पहली बार). ओहायो: शेरोड ब्राउन.आयोवा: जोश ट्यूरेक. नॉर्थ कैरोलिना: रॉय कूपर.मेन: ट्रॉय जैक्सन ने सुसन कॉलिन्स को हराया.

ट्रंप के लिए अब कितनी मुश्किलें?द गार्जियन की ख़बर के अनुसार डेमोक्रेटिक नियंत्रण वाली कांग्रेस ट्रंप के एजेंडे पर अंकुश लगाएगी. बजट, कानून और नियुक्तियों पर रोक, जांच-पड़ताल और संभावित महाभियोग (impeachment) के प्रयास बढ़ सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायिक नियुक्तियों पर भी रोक लग सकती है. ट्रंप को अब वीटो पावर का सहारा लेना पड़ सकता है, लेकिन दो वर्षों तक विपक्षी कांग्रेस के साथ काम करना उनकी ताकतवर छवि को कमजोर करेगा. विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप अब घरेलू और विदेश नीति दोनों में सीमित हो जाएंगे.

अमेरिकन मीडिया के मुताबिक ट्रंप के पास अब सिर्फ वीटो का पावर ही बचा है.

इस बीच ट्रंप ने चुनावी नतीजों को स्वीकार करते हुए कहा है कि वे डेमोक्रेट्स के साथ काम करने को तैयार हैं और “शायद कुछ रास्ता निकल आए.” हालांकि उन्होंने दावा किया, “मैं बैलट पर नहीं था, होता तो हम लैंडस्लाइड से जीतते.” उन्होंने आंशिक रूप से ईरान युद्ध और उम्मीदवारों की कमजोरी को भी हार का जिम्मेदार ठहराया.

राष्ट्रवाद की रथ पर सवार पार्टी का हश्रद अटलांटिक के अनुसार ट्रंप 2016 से MAGA और राष्ट्रवादी एजेंडे को लेकर रिपब्लिकन पार्टी को नए सिरे से गढ़ते रहे हैं. 2024 में उनकी जीत के बाद पार्टी पूरी तरह उनके इर्द-गिर्द घूमती रही. लेकिन 2026 के नतीजे बताते हैं कि यह रथ अब पटरी से उतर रहा है. गहरे लाल राज्यों में हार ने यह साबित किया कि ट्रंप का व्यक्तिगत आकर्षण बिना उनके बैलट पर होने के पार्टी को नहीं बचा सका.

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