राज्यसभा चुनाव 2026: 18 जून की वोटिंग पर सबकी नजर, क्रॉस वोटिंग रोकने में पोलिंग एजेंट की होगी अहम भूमिका

रांची न्यूज़
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रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों के मैदान में होने से 18 जून को होने वाली वोटिंग बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी के नामांकन पर लगा होल्ड हटने के बाद मुकाबला और रोचक हो गया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें मतदान प्रक्रिया और खासकर राजनीतिक दलों के अधिकृत पोलिंग एजेंटों पर टिकी हैं, जिनकी भूमिका क्रॉस वोटिंग रोकने में सबसे अहम मानी जा रही है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं पोलिंग एजेंट?

राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक विधायक को मतदान के बाद अपना भरा हुआ मतपत्र अपनी पार्टी के अधिकृत पोलिंग एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है। यदि विधायक ऐसा नहीं करता है, तो उसका वोट रद्द किया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य क्रॉस वोटिंग पर लगाम लगाना है।

हालांकि, यदि कोई विधायक क्रॉस वोटिंग करने के बाद भी अपना मतपत्र पोलिंग एजेंट को दिखा देता है, तो उसका वोट वैध माना जाएगा। इसी वजह से इस चुनाव में पोलिंग एजेंटों की नियुक्ति और उनकी सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

18 जून को नजरें सिर्फ वोटिंग पर नहीं, बल्कि पोलिंग एजेंटों की भूमिका पर भी रहेंगी, क्योंकि वही तय करेंगे कि क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं पर कितना अंकुश लग पाता है।

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